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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 40
ऐशानस्यासत्रे चित्राम्बरचित्रकृद्धयं प्रोक्तम् । ऐशाने त्वग्निभयं दूषणमप्युत्तमस्त्रीणाम् ॥
यदि ईशान कोण के समीप (उत्तर दिशा से चतुर्थ भाग) में स्थित दीप्त शकुन हो तो चित्र बत्र और चित्र बनाने वाले का होता है। ईशान कोण में स्थित दीप्त शकुन हो तो अग्निभय और उत्तम रित्रयों में भी दोष होता है।
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