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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 4
याम्पेनाचे नृपपुत्रदर्शनं सिद्धिरभिमतस्याप्तिः । परतः स्रीधर्माप्तिः सर्पपयवलव्धिरप्युक्ता ॥
दक्षिण दिशा के प्रथम भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो राजकुमार कर दर्शन, कार्यों की सिद्धि और अभी अर्थ की प्राप्ति होती है। द्वितीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो खी और धर्म एवं सरसों और जी को भी प्राप्ति होती है।
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