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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 37
वायुप्रस्तविनाशः परे परे शस्त्रपुस्तवार्तानाम् । कोणे पुस्तकनाशः परे विषस्तेनवायुभयम् ॥
यदि पश्चिम दिशा के पष्ठ भाग में स्थित दीप्त शकुन हो तो वातरोगियों का नाश, सप्तम भाग में स्थित हो तो शत और पुस्तकों से जीविका करने वालों का नाश, वायव्य कोण में स्थित हो तो शास्त्र का नाश तथा वायव्य कोण से द्वितीय भाग में स्थित दीप्त शकुन हो तो विष, चोर और वायु का भय होता है।
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