प्रमदागर्भविनाशस्तृतीयभागे भवेच्चतुर्थे च । हरण्यककारुकयोः प्रध्वंसः शस्त्रकोपच ॥
आग्नेय कोण से तृतीय भाग में स्थित दीप्त सकुन हो तो खो के गर्भ का नारा होला है। आग्नेय कोण से चतुर्थ भाग में स्थित दीप्त शकुन हो तो स्वर्णकार और मित्रकार का नारा दथा सत्रकोप होता है।
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