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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 30
तदनन्तरदिशि नाशः कनकस्य भयं सुवर्णकाराणाम्। अर्थक्षयस्तृतीये कलहः शस्त्रप्रकोषध ॥
यदि पूर्व दिशा के द्वितीय भाग में दप्तर से जो सोने का नाम और स्वर्णकार शकुन हो तो पन का नाश, काय को पथ होता है। पूर्व दिशा के सुलभा में और
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