ये पूर्वकथित समस्त फल खान्त दिशाओं के कहे गये है। अब दीप्त दिशाओं के फल कहता हूँ। यदि दोप्न पूर्व दिशा में स्थित शकुन हो तो राजा का भय और शत्रुओं के साथ समागम होता है।
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