नाभि के मध्य में वायव्य और नैर्द्धस्य को छोड़कर शेष छ: अरों में शकुन हो तो सुभ फल देने बाली तथा आयव्य और नैर्भूत्य कोण के अरों में स्थित शकुन हो तो क्लेश देने वाली यात्रा होती है।
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