याम्येऽष्टांशे पश्चाद् द्विषट्त्रिसप्ताष्टमेषु मध्यफला। सौम्येन च द्वितीये शेषेष्यतिशोभना यात्रा ॥
प्रदक्षिणक्रम से दक्षिण के आठवें, पक्षिम के दूसरे, छठे, तीसरे, साठवें और 'आठवें तथा उत्तर के दूसरे अष्टमांश में शाना सकुन हो तो मध्यम फल वाली यात्रा होती है। शेष पच्चीस अष्टमांशों में शुभ फल देने बाली यात्रा होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।