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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 26
ऐशाने जतयुक्ता धनिता सन्दर्शनं समुपयाति । लब्यिक्ष परिज्ञेया कृष्णायः शखघण्टानाम् ॥
यदि ईशान कोण के अर में स्थित शकुन हो तो जत करने वाली स्त्री का दर्शन तथा करता एकोडा, शरत्र और घण्टों का लाभ होना है।
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