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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 25
कौवेर्या दिशि योऽरस्तप्रस्थो वित्तलाभमाख्याति । भागवतेन समागमनमाचष्टे पीतवत्रैश्च ॥
उत्तर दिशा के अर में स्थित शकुन हो तो धन का लाभ तथा वैष्णव, ब्राह्मण और पीले बत्र के साथ समागम होता है।
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