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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 23
अपरस्यां दिशि योऽरस्तत्रासक्तिः कृषीवलैर्भवति । सामुद्रद्रव्यसुसारकाचफलमद्यलब्धिच ॥
यदि पश्चिम दिशा के आर में स्थित शकुन हो तो किसानों के साथ समागम था समुद्र में उत्पत्र द्रव्य, करच ( भिविशेष), फल और मद्य का लाभ होता है।
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