उस्साक्रीडककापालिकागमो नैऋति समुद्दिष्टः । वृषभस्य चात्र लब्धिर्माषकुलत्याद्यमशनं च ॥
यदि नैऋत्य कोण के अर में स्थित शकुन हो तो गाय, खेलने वाला और कापालिक के साथ समागम, बैल का लाभ तथा उड़द, कुलथी आदि भोजन का लाभ होता है।
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