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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 21
नेमीभागं बुद्ध्वा नाभीभागश्च दक्षिणे योऽरः । धार्मिकजनसंयोगस्तत्र भवेद् धर्मलाभश्च ॥
चक्र की नेमि (प्रान्त) और नाभि के भाग को जानकर दक्षिण में जो अर हो, उसमें स्थित शकुन हो तो धार्मिक मनुष्यों के साथ समागम और धर्म का लाभ होता है।
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