पूर्व दिशा के बाद प्रदक्षिणक्रम से द्वितीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो
सोने की प्राप्ति और अभीष्ट अर्थ को सिद्धि होती है। यदि तृतीय भाग में स्थित शकुन
कोलाहल करे तो शख, घन और सुपारी की प्राप्ति होती है।
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