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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 19
नाभिस्थे बन्धुसुहत्समागमस्तुष्टिरुत्तमा भवति । प्राषक्तपट्टवस्त्रागमस्त्वरे नृपतिसंयोगः ॥
यदि नाभिस्यान में स्थित शकुन हो तो बन्धु और मित्रों के साथ समागम तया उत्तम तुष्टि का लाभ होता है। यदि पूर्व भागस्थित भर में शकुन हो तो लाल बरत्र का लाभ और राजा के साथ समागम होता है।
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