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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 17
रजकेन समायोगो जलजद्रव्यागमच परतोऽतः । हस्त्युपनीविसमाज चास्माद् धनहस्तिलव्यिश्च ॥
इंसान कोण से तृतीय भाग में स्थित छकुन कोलाहल करे तो धोनी के साथ समागम और जल में उत्पत्र द्रव्य का लाभ होता है। ईशान कोण से चतुर्थ भाग में नियत सकुन कोलाहल करे हो हाथी से जीविका करने वाले के साथ समागम तथा उससे धर और हाथी का लाभ होता है।
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