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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 16
ऐशान्यां देवलकोपसङ्गमो धान्यरत्लपशुलब्धिः । प्राक् प्रथमे वस्त्राप्तिः समागमचापि बन्धक्या ॥
ईशान कोण में स्थित शकुन कोलाहल करे तो देवतक (पुजारी आदि) के साथ समागम तथा धान्य, रत्न और पशुओं का लाभ होता है। पूर्व के प्रथम भाग (ईशान कोण से द्वितीय भाग) में स्थित शकुन कोलाहल करे तो वस्त्र की प्राप्ति और वेश्या के साथ समागम होता है।
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