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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 15
बेश्यावदुदाससमागमः परे शुक्लपुष्पफललब्धिः । अत ऊर्ध्व चित्रकरस्य दर्शनं चित्रवस्त्राप्तिः ॥
उत्तर दिशा से तृतीय भाग में स्थित सकुन कोलाहल करे तो वेश्या, ब्राह्मण और मृत्य का समागम तथा सफेद फूलों का लाभ होता है। उत्तर दिशा से चतुर्थ भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो चित्रकार का दर्शन और चित्र बलों का लाभ होता
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