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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 14
दचितण्डुललाजानरां लब्धिरुदम् दर्शनं च विप्रस्य । अर्थावाप्तिरनन्तरमुपगच्छति मार्यवाहक्ष ॥
उत्तर दिसा में स्थित शकुन कोको दीक्ल और खोलों (लामा) की प्रतिसाद है। उत्तर दिशा में द्वितीयाद में स्थित शकुन कोलाहल को धन की प्राप्ति और के साथ समागम होता है।
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