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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 11
परतोऽपि दर्शनं वातरोगिणां चन्दनागुरुप्राप्तिः । आयुधपुस्तकलब्धिस्तृद्द्वत्तिसमागमश्चोर्ध्वम् ॥
पश्चिम दिशा से तृतीय भाग में स्थित शकुर कोलाहल करे तो वातरोगियों का दर्शन तथा चन्दन और अगर की प्राप्ति होती है। पश्चिम दिशा से चतुर्थ भाग में स्थित शकुन फोलाहल करे तो शाख और पुस्तक की प्राप्ति तथा इन वस्तुओं को बेचने वाले से मुलाकात होती है।
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