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बृहत्संहिता • अध्याय 87 • श्लोक 10
वारुण्यामर्णवजातरत्नवैदूर्यमणिमयप्राप्तिः परतोऽतः शबरव्याधचौरसङ्गः पिशितलव्धिः ॥
पश्चिम दिशा में स्थित शकुन कोलाहल करे तो समुद्र से उत्पन्न रत्न, वैदूर्य मणि और रत्नों से बनाये हुये भाण्डों की प्राप्ति होती है। पश्चिम दिशा से द्वितीय भाग में स्थित शकुन कोलाहल करे तो भील, व्याध और चोरों का संग तथा मांस का लाभ होता
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