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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 83
पृच्छासु रूप्यकनकातुरभामिनीनां मेषाव्ययानमखगोकुलसंश्रवासु । न्यशेधरक्ततरुरोष्ट्रककीचकाख्या- धूतद्रुमाः खदिरबिल्वनगार्जुनाच ॥
प्रश्नकाल में शकुन या प्रश्नकर्ता पूर्व दिन में हो तो रजतु, आग्नेय कोप में सुवर्ण, दक्षिण में पीड़ित, नैर्मात्य में खो, पश्चिम में बकरा, पायध्य में सवारी, उत्तर में यज्ञ और ईशान कोण में शकुन या प्रश्नकर्ता हो तो गोकुलसम्बन्धी प्रश्न कहना चाहिये। पूर्व में बढ़, आग्नेय कोण में रात पृथ, दक्षिण में लोध्र, नैर्मात्य कोण में छिद्रसहित बाँस, पद्मिम में आम, पापण्य कोण में खेर, उसर में बेल और ईशान कोण में अर्जुन वृक्ष होता है।
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