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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 79
तरुतालीविदलाम्बरसलिलजशरचर्मपहलेखाः स्युः । द्वारिंशत्यविभक्ते दिक्चक्रे तेषु कार्याणि ॥
अग्रिम अध्याय के वैयति इत्यादि आ लोक में लेख की प्राप्ति की गई है। बसेकी किसके पा होती है, उसको यहाँ पर स्पार कर रहे हैं। पूर्व दिशा में कुछ के उपाय पते पर आग्नेय कोण में शकुन हो पो बात के पते पर पह पपदे और बोहोराले धान किये हुये
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