शकटेनोव्रतस्थे वा छायास्थे छत्रसंयुते । एकप्रियश्चसप्ताहात् पूर्वाद्यास्वन्तरासु च ॥
किसी उच्च प्रदेश (पर्वत आदि पर शकुन बैठा हो तो शकटारूद मनुष्य का और छाया में शकुन बैठा हो तो असं पुरुष का आगमन सूचित करता है। पूर्व आदि दिशा और आग्नेय आदि विदिशा में पूर्वोक्त कुन हो तो क्रम से एक, तीन, पाँच और सात दिन में शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं। जैसे पूर्व दिशा में शकुन बैठे हों तो एक दिन में तथा उत्तर दिशा में बैठे हो तो सात दिन में शुभाशुभ फल देते हैं। आग्नेय कोप में शकुन बैते हो तो एक दिन में, वैश्य कोण में बैठे हो जो तीन दिन में, पापण्य कोण में बेते हो तो पाँच दिन में और ईशान कोष में शकुन बैते हो तो सात दिन में शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं।
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