शान्तः पश्चमदीप्तेन दिग्नरागमकारी वा विरुतो विजयावहः । दोषकृत् तद्विपर्यये ॥
शाका शकुन अपने से पाँचवों दीप्त दिशा में स्थित दीप्त शकुन द्वारा शब्दायमान हो तो उस दिशा में स्थित पुरुष का आगमन कहता है। उससे विपरीत (दीप्त शकुन अपने से पाँचवीं शान्त दिशा में स्थित शान्त शकुन द्वारा शब्दायमान हो तो दोष करने वाला होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।