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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 70
बन्धघातभयानि स्युः पादोरूमस्तकान्तिगैः । शष्पाप: पिशितान्नादैर्दोषवर्ष क्षयग्रहाः ॥
पाद, ऊरु और शिर के निकट होकर शकुन चला जाय तो क्रम से बन्धन, पात और भय को सूचित करता है। घास खाता हुआ शकुन दिखाई दे तो दोष उत्पत्र करने बाला, जल पीता हुआ दिखाई दे तो वर्षा करने वाला, मांस खाता हुआ दिखाई दे तो अंगक्षत करने चाला और अन खाता हुआ शकुन दिखाई दे तो किसो बन्यु का समागम कराने वाला होता है।
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