सर्वे दुर्भिक्षकत्र्तारः स्वजातिपिशिताशिनः । सर्पमूषकमार्जारपृथुलोमविवर्जिताः
मु० ५० दि०-२६
॥
सर्प, चूहा, बिल्ली और मछली के अतिरिक्त कोई भी शकुन
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