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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 67
एकस्थाने रुवन् दीप्तः सप्ताहाद् ग्रामघातकः । पुरदेशनरेन्द्राणामृत्वर्धायनवत्सरात् ॥
यदि एक स्थान पर स्थित शकुन दीप्त होकर सात दिन तक शब्द करता रहे तो गाँव के नाश को, दो मास तक शब्द करता रहे तो पुर के घात को, तीन मास तक शब्द करता रहे तो देश के घात को और एक वर्ष तक शब्द करता रहे तो राजा के घात को सूचित करता है।
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