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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 65
असिद्धिसिद्धिदौ शेयौ निर्धाराहारकारिणौ । स्थानाद्ववन् बजेद्यात्रां शंसते त्वन्यथागमम् ॥
मल का त्याग करने वाले और भोजन करने वाले शकुन क्रम से कार्य की असिद्धि और सिद्धि करने वाले होते हैं। यदि शब्द करते हुये शकुन अपने स्थान से चले जायें तो गमन और पुनः अपने स्थान पर आकर बैठ जायें तो किसी के आगमन को सूचित करते हैं।
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