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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 60
अपसख्यास्तु शकुना दीप्ता भयनिवेदिनः । आरम्भे शकुनो दीप्तो वर्षान्तस्तद्भयङ्करः ॥
दोप्त दिशा में स्थित होकर बाई तरफ कुन हो से भयको सूचित करता है तथा कार्य के शाम्भ में ही दीप्त शकुन दिखाई दे तो एक वर्ष तक उस कार्य में भय को अभिमत का है।
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