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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 6
ग्रामारण्याम्बुभूव्योमद्युनिशोभयचारिणः रुतयातेक्षितोक्तेषु ग्राह्याः पुंस्त्रीनपुंसकाः ॥
गाँव में रहने वाले, वनचर, जलचर, पृथ्वीचर, आकाशचर, दिनचर, रात्रिचर और उभयचर जीवों के शब्द, गमन, दृष्टि और उक्ति से पुरुष, स्त्री और नपुंसक का ग्रहण करना चाहिये।
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