विसर्व शकुनः पूर्व स एवं निरुणद्धि चेत्। प्राह यातुररेमृत्युं डमरं रोगमेव वा ॥
जो शकुन पहले शुभ पेश करके बाद में यात्रा र निषेध करे तो यह शत्रु द्वारा गमन करने पाले भी मृत्यु, शत्रकलह या रोग को सूचित करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।