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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 59
विसर्व शकुनः पूर्व स एवं निरुणद्धि चेत्। प्राह यातुररेमृत्युं डमरं रोगमेव वा ॥
जो शकुन पहले शुभ पेश करके बाद में यात्रा र निषेध करे तो यह शत्रु द्वारा गमन करने पाले भी मृत्यु, शत्रकलह या रोग को सूचित करता है।
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