मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 58
पूर्व प्रावेशिको पुत्वा पुनः प्रास्थानिको भवेत्। सुखेन सिद्धिमीच प्रवेशे तद्विपर्ययात् ॥
यदि यात्राकाल में पहले प्रवेशकात्तिक शकुन होकर बाद में पाशकालिक शकुन हो तो सुखपूर्वक कार्य की सिद्धि होती है तथा गृहप्रवेश आदि काल में इसके विपरीत (पहले शकुन होकर बाद में प्रवेशकालिक शकुन हो तो सुखपूर्वक कार्य की सिद्धि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें