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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 57
विसर्जयति यरोक एकच प्रतिषेधति । स विरोधोऽशुभो यातुर्बाह्यो यो बलवत्तरः ॥
यदि यात्रा के समय एक शकुन यात्रा करने की आज्ञा दे और दूसरा निषेध करे तो वह 'विरोध'संज्ञक शकुन अशुभ फल देने वाला होता है अथवा उन दोनों में जो बली हो, उसका ग्रहण करना चाहिये।
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