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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 56
केचित्तु शकुनद्वारमिच्छन्त्युभयतः स्थितैः । शकुनैरेकजातीयैः शान्तचेष्टाविराविभिः ॥
किसी का मत है कि एक जाति वाले, शान्त चेष्टा से शब्द करने वाले, दोनों पार्श्व में स्थित शकुनों से शकुनद्वार संज्ञक शकुन बनता है।
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