परिपसंजक शकुन होने पर गेमन करने वाले का नाश होता है; किन्तु वे
दोनों शकुन यथाभाग (दक्षिण भागे वाले दक्षिण भाग में और वाम भाग वाले वाम भाग में) स्थित होकर शान्तिपूर्वक शब्द करें तो 'शकुनद्वार' संज्ञक होते हैं। इनमें गमन करने वाले के अभीष्ट अर्थ की सिद्धि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।