यात्रा में जो वाम और दक्षिणगत शकुन शुभ हैं, वे राजा के दर्शन, गृहप्रवेश आदि, पर्वतप्रवेश, वनप्रवेश और नदी के पार होने में क्रम से आगे और पीछे में शुभ होते हैं। जैसे-यात्रा में जो वाम में शुभ हैं, वे यहाँ पर आगे में और यात्रा में जो दक्षिण में शुभ 'हैं, वे यहाँ पर पीछे में शुभ होते हैं।
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