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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 51
दिवा यानप्रतीपविधिना शुभदा भवन्ति।। ইলি प्रस्थानयद्माद्याः कुरङ्गरुरुवानराः । अहश प्रथमे भागे चापयझुलकुक्कुटाः ॥
दिन में पूर्वोक्त कर्म आदि करना हो तो यहाँ पर कुरङ्ग, रुरु (मृगनाति) और चार को; पूर्वाद्ध में चाय, वहुल और मुर्गा को तथा रात्रि के अन्त
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