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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 50
कर्मसङ्गमयुद्धेषु यानव्यस्तगता प्रवेशे नहमार्गणे । विशेषधात्र यक्ष्यते ॥
कर्भर (जो करते हैं), संगम ( किसी वृद्ध आदि के साथ संयोग) युद्ध, प्रवेश (गृहप्रवेश आदि) और नह द्रब्य के अन्वेषण में यात्रा में कथित प्रदेश से विरुद्ध प्रदेश में स्थित शकुन शुभ होता है। जैसे यात्रा में जो दक्षिण में शुभ है ये यहाँ पर नाम में, यात्रा में जो चाम में शुभ हैं से यहाँ पर दक्षिण में, यात्रा में जो आगे में शुभ हैं ये यहाँ पर पीछे में, यात्रा में जो पीछे में शुभ हैं वे यहाँ पर आगे में, यात्रा में जो पूर्व दिशा में शुभ हैं ये यहाँ पर पश्चिम में, पात्रा में जो पश्चिम में शुभ हैं वे यहाँ पर पूर्व में, यात्रा में जो दक्षिण में शुभ हैं वे यहाँ पर उत्तर में और यात्रा में जो उत्तर में शुभ है ये यहाँ पर दक्षिण में शुभ होते हैं।
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