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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 5
अन्यजन्मान्तरकृतं कर्म पुंसां शुभाशुभम् । यत्तस्य शकुनः पाकं निवेदयति गच्छताम् ॥
मनुष्यों के पूर्वजन्मार्जित जो शुभाशुभ कर्म होते हैं, उन कर्मों के शुभाशुभ फल को गमनकालिक शाकुन प्रकाशित करता है।
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