अयाशुभानाह- जालश्चचरर्णा नेष्टी प्राग्याम्यी शत्रपातकी।
पश्चादामवषण्डौ च खलासनहलान्युदक् ॥
पूर्व में जाल के साथ चलने वाले और कुते के साथ चलने वाले, दक्षिण में शख और अधिक, पडिप में आसव (मद्य आदि) और नपुंसक तथा उत्तर में आसन और हल अशुभ होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।