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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 49
अयाशुभानाह- जालश्चचरर्णा नेष्टी प्राग्याम्यी शत्रपातकी। पश्चादामवषण्डौ च खलासनहलान्युदक् ॥
पूर्व में जाल के साथ चलने वाले और कुते के साथ चलने वाले, दक्षिण में शख और अधिक, पडिप में आसव (मद्य आदि) और नपुंसक तथा उत्तर में आसन और हल अशुभ होते हैं।
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