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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 46
ओजाः प्रदक्षिणं शस्ता मृगाः सनकुलाण्डजाः । चाषः सनकुलो वामो भृगुराहापराह्नतः ॥
विषमसंख्यक ( १, ३, ५, ७ आदि) मृग, नकुल और अण्डज प्राणी वाम पार्ड से आगे आकर दक्षिण पार्श्व में आ जायें तथा नकुल के साथ चाप पक्षी दक्षिण पाचं से आकर वाम पार्श्व में आ जायें तो शुभ होते हैं। मृगु का मत है कि, ये सभी अपराह्न में शुभकारी होते हैं, पूर्वाह में नहीं।
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