रुतकीर्तनदष्टेषु
भारद्वाजाजवर्हिणः ।
धन्या नकुलचाषी च
सरटः पापदोऽधतः ॥
भारद्वाज, बकरा, मपूर-इन शब्द कीर्तन और देखना धन्य है तथा नेता, चाप और घरट-इनका आगे में आना अग्रुप है।
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