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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 43
प्रामी मध्यमष‌ज्ञौ तु गान्धार क्षेति शोभनाः । पङ्गमध्यमगान्धारा ऋषभ स्वरा हिताः ॥
यात्रा में मध्यम, षड्ज, गान्धार- ये तीनों स्वर शुभ और षड्न, मध्यम, पान्थर, अषप-ये चार स्वर हितकारी होते है।
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