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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 42
क्ष्वेशास्फोटितपुण्याहगीतशङ्खाम्बुनिः स्वनाः । सतूर्वाध्ययनाः पुंवत् स्त्रीवदन्या गिरः शुभाः ॥
श्वेत (मुख का शब्द), आस्फोट (हाथों का शब्द), पुण्याह शब्द, शंख का शब्द, जल का शब्द, तुरही का शब्द और वेदध्वनि-ये सभी पुरुष की तरह (याम- भागस्यित) शुभ होते हैं तथा अन्य मांगलिक शब्द श्रीवत् (दक्षिण भागस्थित ) शुभ होते हैं।
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