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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 4
तानि दृष्ट्वा चकारेमं सर्वशाकुनसंग्रहम् । वराहमिहिरः प्रीत्या शिष्याणां ज्ञानमुत्तमम् ॥
उन सबको देखकर वराहमिहिर ने शिष्यों की प्रसत्रता के लिये उत्तम ज्ञानयुत शाकुनसंग्रह किया है।
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