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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 39
भिन्न भैरवदीनार्तपरुषक्षामजर्जराः स्वनानेष्टाः शुभाः शान्तहृष्टप्रकृतिपूरिताः ॥
विषम, भयंकर, दीन, जर्जर (फूटते हुये भाण्ड से उत्पन्न)- ये सभी शब्द शुभ नहीं होते। अर्काभिमुख होकर, मधुर स्वर से और हर्षपूर्वक किये हुये सभी शब्द शुभ होते हैं।
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