यात्रा में गमन करते हुये या एक स्थान पर स्थित पुरुष के जिस दिशा में स्थित होकर शकुन शब्द करे, उस दिशा में स्थित प्राणी के साथ समागम कहना चाहिये। जैसे पूर्व और आग्नेय कोण के प्रथम त्रिभाग में शकुन हो तो कोशाध्यक्ष, द्वितीय में हो तो अग्निजीवी, तृतीय त्रिभाग में तापस इत्यादि के साथ समागम कहना चाहिये।
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