राजा कुमारो नेता च दूतः श्रेष्ठी चरो द्विजः ।
राजाध्यक्षक्ष पूर्वाद्याः क्षत्रियाद्या चतुर्दिशम् ॥
पूर्व आदि आठ दिशाओं के प्रदक्षिणक्रम से राजा, कुमार, सेनापति, दूत, सेठ, गुप्तचर, ब्राह्मण और गनाध्यक्ष-ये आठ तथा पूर्व आदि चार दिशाओं के क्षत्रिय आदि ( क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ब्राह्मण) चार अधिपति होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।