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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 36
वैष्णवश्चरकचैव वाजिनां रक्षणे रतः । द्वात्रिंशदेवं भेदाः स्युः पूर्वदिग्भिः सहोदिताः ॥
ईशान कोण और पूर्व दिशा के अन्तर्गत प्रदेश के त्रिभाग में क्रम से वैष्णव, चरक एवं सहीस- ये तीन स्थित रहते हैं। इस प्रकार पूर्व आदि आठ दिशाओं के बतीस भेद होते हैं।
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